Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 12.346.5-6h: हे श्रेष्ठ! जो मनुष्य मन, वाणी और कर्म से अविनाशी भगवान विष्णु के प्रति द्वेष रखता है, उसे न तो इस लोक में और न ही परलोक में स्थान मिलता है। 5 1/2॥   |   mahabharat अध्याय 12.346: नारायणकी महिमासम्बन्धी उपाख्यानका उपसंहार   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 346: नारायणकी महिमासम्बन्धी उपाख्यानका उपसंहार  »  श्लोक 5-6h
 
 
श्लोक  12.346.5-6h 
नैव तस्यापरो लोको नायं पार्थिवसत्तम॥ ५॥
कर्मणा मनसा वाचा यो द्विष्याद् विष्णुमव्ययम्।
 
 
अनुवाद
हे श्रेष्ठ! जो मनुष्य मन, वाणी और कर्म से अविनाशी भगवान विष्णु के प्रति द्वेष रखता है, उसे न तो इस लोक में और न ही परलोक में स्थान मिलता है। 5 1/2॥
 
The best! One who harbors hatred towards the indestructible Lord Vishnu through his mind, speech and actions has no place either in this world or in the next world. 5 1/2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)