Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.346.22: वे इस जगत के मूल कारण, मोक्षरूपी अमृत (मोक्ष का आश्रय), सूक्ष्मरूप, दूसरों को आश्रय देने वाले, अचल और सनातन हैं। हे उदार शौनक! मन को वश में करने वाले सांख्ययोगी अपनी बुद्धि से उन्हें ही चुनते हैं। | mahabharat अध्याय 12.346: नारायणकी महिमासम्बन्धी उपाख्यानका उपसंहार । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
स हि लोकयोनिरमृतस्य पदं
सूक्ष्मं परायणमचलं हि पदम्।
तत्सांख्ययोगिभिरुदारवृतं
बुद्धॺा यतात्मभिरिदं सनातनम्॥ २२॥
अनुवाद
वे इस जगत के मूल कारण, मोक्षरूपी अमृत (मोक्ष का आश्रय), सूक्ष्मरूप, दूसरों को आश्रय देने वाले, अचल और सनातन हैं। हे उदार शौनक! मन को वश में करने वाले सांख्ययोगी अपनी बुद्धि से उन्हें ही चुनते हैं।
He is the root cause of this universe, the nectar of salvation (shelter of salvation), subtle in form, the one who gives shelter to others, unshakable and eternal. O generous Shaunak! The Sankhya Yogis who control their minds choose Him with their intellect.
इति श्रीमहाभारते शान्तिपर्वणि मोक्षधर्मपर्वणि नारायणीये षट्चत्वारिंशदधिकत्रिशततमोऽध्याय:॥ ३४६॥
इस प्रकार श्रीमहाभारत शान्तिपर्वके अन्तर्गत मोक्षधर्मपर्वमें नारायणकी महिमाविषयक तीन सौ छियालीसवाँ अध्याय पूरा हुआ॥ ३४६॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥