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mahabharat 12.346.21: जो सम्पूर्ण जगत् का साक्षी, अजन्मा, अन्तर्यामी, पुरातन पुरुष, सूर्य के समान तेजस्वी, ईश्वर और सब प्रकार से सबकी गति करने वाला है, उस परमेश्वर का तुम सब लोग ध्यान करो; क्योंकि शेषशायी भी वासुदेव रूपी नारायण ऋषि को नमस्कार करती हैं॥21॥   |   mahabharat अध्याय 12.346: नारायणकी महिमासम्बन्धी उपाख्यानका उपसंहार   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 346: नारायणकी महिमासम्बन्धी उपाख्यानका उपसंहार  »  श्लोक 21
 
 
श्लोक  12.346.21 
तं लोकसाक्षिणमजं पुरुषं पुराणं
रविवर्णमीश्वरं गतिं बहुश:।
प्रणमध्वमेकमनसो यत:
सलिलोद्भवोऽपि तमृषिं प्रणत:॥ २१॥
 
 
अनुवाद
जो सम्पूर्ण जगत् का साक्षी, अजन्मा, अन्तर्यामी, पुरातन पुरुष, सूर्य के समान तेजस्वी, ईश्वर और सब प्रकार से सबकी गति करने वाला है, उस परमेश्वर का तुम सब लोग ध्यान करो; क्योंकि शेषशायी भी वासुदेव रूपी नारायण ऋषि को नमस्कार करती हैं॥21॥
 
All of you should pay attention to that God who is the witness of the entire world, the unborn, the inner being, the ancient man, as bright as the sun, God and the movement of all in every way; Because Sheshshayi also bows down to Narayan Rishi in the form of Vasudeva. 21॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)