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mahabharat 12.346.10: नरेश्वर! देवर्षि नारद ने इस धर्म को, इसके रहस्यों और संग्रहों सहित, साक्षात् जगदीश्वर नारायण से प्राप्त किया था॥10॥   |   mahabharat अध्याय 12.346: नारायणकी महिमासम्बन्धी उपाख्यानका उपसंहार   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 346: नारायणकी महिमासम्बन्धी उपाख्यानका उपसंहार  »  श्लोक 10
 
 
श्लोक  12.346.10 
नारदेन तु सम्प्राप्त: सरहस्य: ससंग्रह:।
एष धर्मो जगन्नाथात् साक्षान्नारायणान्नृप॥ १०॥
 
 
अनुवाद
नरेश्वर! देवर्षि नारद ने इस धर्म को, इसके रहस्यों और संग्रहों सहित, साक्षात् जगदीश्वर नारायण से प्राप्त किया था॥10॥
 
Nareshwar! Devarshi Narad had received this religion along with its secrets and collections from Jagdishwar Narayan in person. 10॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)