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mahabharat 12.345.21: पिता, पितामह और परदादा के रूप में मुझे इन तीन शरीरों में स्थित जानना चाहिए ॥21॥   |   mahabharat अध्याय 12.345: भगवान् वराहके द्वारा पितरोंके पूजनकी मर्यादाका स्थापित होना   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 345: भगवान् वराहके द्वारा पितरोंके पूजनकी मर्यादाका स्थापित होना  »  श्लोक 21
 
 
श्लोक  12.345.21 
पिता पितामहश्चैव तथैव प्रपितामह:।
अहमेवात्र विज्ञेयस्त्रिषु पिण्डेषु संस्थित:॥ २१॥
 
 
अनुवाद
पिता, पितामह और परदादा के रूप में मुझे इन तीन शरीरों में स्थित जानना चाहिए ॥21॥
 
In the form of father, grandfather and great grandfather, I should be known to be situated in these three bodies. 21॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)