श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 344: नर-नारायणका नारदजीकी प्रशंसा करते हुए उन्हें भगवान् वासुदेवका माहात्म्य बतलाना  »  श्लोक 8
 
 
श्लोक  12.344.8 
तस्मादेव समुद्भूतं तेजो रूपगुणात्मकम्।
येन संयुज्यते सूर्यस्ततो लोके विराजते॥ ८॥
 
 
अनुवाद
उन्हीं से रूप और गुणों के अनुरूप वह तेज प्रकट हुआ है, जिससे सूर्यदेव संयुक्त हैं। इसीलिए वे जगत में प्रकाशित हो रहे हैं ॥8॥
 
It is from them that the radiance specific to the form and qualities has emerged, with which the Sun God is united. That is why he is shining in the world. ॥ 8॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)