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mahabharat 12.344.26: उन्होंने विधिपूर्वक नारायण-सम्बन्धी अनेक मन्त्रों का जप किया और एक हजार दिव्य वर्षों तक नर-नारायण के आश्रम में रहे॥26॥   |   mahabharat अध्याय 12.344: नर-नारायणका नारदजीकी प्रशंसा करते हुए उन्हें भगवान् वासुदेवका माहात्म्य बतलाना   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  12.344.26 
जजाप विधिवन्मन्त्रान् नारायणगतान् बहून्।
दिव्यं वर्षसहस्रं हि नरनारायणाश्रमे॥ २६॥
 
 
अनुवाद
उन्होंने विधिपूर्वक नारायण-सम्बन्धी अनेक मन्त्रों का जप किया और एक हजार दिव्य वर्षों तक नर-नारायण के आश्रम में रहे॥26॥
 
He methodically chanted many mantras related to Narayana and stayed at the hermitage of Nara-Narayana for a thousand divine years.॥26॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)