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mahabharat 12.344.21: ब्रह्मन्! उसी परमात्मा का सदैव परम कल्याण हो, जो तीनों लोकों में परमेश्वर का प्रिय अवतार होने वाला है - यही हमारी तपस्या का उद्देश्य है॥21॥   |   mahabharat अध्याय 12.344: नर-नारायणका नारदजीकी प्रशंसा करते हुए उन्हें भगवान् वासुदेवका माहात्म्य बतलाना   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  12.344.21 
ये तु तस्यैव देवस्य प्रादुर्भावा: सुरप्रिया:।
भविष्यन्ति त्रिलोकस्थास्तेषां स्वस्तीत्यथो द्विज॥ २१॥
 
 
अनुवाद
ब्रह्मन्! उसी परमात्मा का सदैव परम कल्याण हो, जो तीनों लोकों में परमेश्वर का प्रिय अवतार होने वाला है - यही हमारी तपस्या का उद्देश्य है॥21॥
 
Brahman! May there always be supreme well-being of the same God, who is going to be the beloved incarnation of the Supreme God in all the three worlds – this is the purpose of our penance. 21॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)