श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 344: नर-नारायणका नारदजीकी प्रशंसा करते हुए उन्हें भगवान् वासुदेवका माहात्म्य बतलाना  »  श्लोक 14-15h
 
 
श्लोक  12.344.14-15h 
आदित्यदग्धसर्वाङ्गा अदृश्या: केनचित् क्वचित् ॥ १४॥
परमाणुभूता भूत्वा तु तं देवं प्रविशन्त्युत।
 
 
अनुवाद
सूर्यदेव उनके सम्पूर्ण शरीर के अंगों को जलाकर भस्म कर देते हैं। फिर उन्हें कहीं कोई देख नहीं पाता। वे अणु बनकर उन्हीं सूर्यदेव में प्रविष्ट हो जाते हैं। ॥14 1/2॥
 
The Sun God burns their entire body parts to ashes. Then no one can see them anywhere. They become atoms and enter the same Sun God. ॥14 1/2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)