श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 343: जनमेजयका प्रश्न, देवर्षि नारदका श्वेतद्वीपसे लौटकर नर-नारायणके पास जाना और उनके पूछनेपर उनसे वहाँके महत्त्वपूर्ण दृश्यका वर्णन करना  »  श्लोक 7-9h
 
 
श्लोक  12.343.7-9h 
सौतिरुवाच
तस्मिन् यज्ञे वर्तमाने राज्ञ: पारिक्षितस्य वै॥ ७॥
कर्मान्तरेषु विधिवद् वर्तमानेषु शौनक।
कृष्णद्वैपायनं व्यासमृषिं वेदनिधिं प्रभुम्॥ ८॥
परिपप्रच्छ राजेन्द्र: पितामहपितामहम्।
 
 
अनुवाद
सूतपुत्र बोले - शौनक! राजा जनमेजय का यज्ञ नित्य की भाँति चल रहा था। उसमें जब राजेन्द्र जनमेजय को विभिन्न कार्यों के बीच अवकाश मिला, तब उन्होंने अपने पूर्वजों के पितामह, महान वेदनिधि भगवान कृष्णद्वैपायन महर्षि व्यास से इस प्रकार पूछा। 7-8 1/2"
 
Sutaputra said – Shaunak! The yagya of King Janamejaya was going on as usual. In that, when Rajendra Janmejay got a break between various works, he asked the great Vednidhi Lord Krishnadvaipayana Maharishi Vyas, the great grandfather of his ancestors, in this manner. 7-8 1/2"
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)