Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.343.65: तीनों लोकों में भगवान् को वहाँ के बुद्धिमान् और महान् भक्तों से बढ़कर कोई प्रिय नहीं है; इसलिए मैंने अनन्य भक्ति से उनकी शरण ली है ॥ 65॥ | mahabharat अध्याय 12.343: जनमेजयका प्रश्न, देवर्षि नारदका श्वेतद्वीपसे लौटकर नर-नारायणके पास जाना और उनके पूछनेपर उनसे वहाँके महत्त्वपूर्ण दृश्यका वर्णन करना । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
न तस्यान्य: प्रियतर: प्रतिबुद्धैर्महात्मभि:।
विद्यते त्रिषु लोकेषु ततोऽस्यैकान्तिकं गत:॥ ६५॥
अनुवाद
तीनों लोकों में भगवान् को वहाँ के बुद्धिमान् और महान् भक्तों से बढ़कर कोई प्रिय नहीं है; इसलिए मैंने अनन्य भक्ति से उनकी शरण ली है ॥ 65॥
In the three worlds no one is more dear to the Lord than the wise and great devotees there; therefore I have taken refuge in Him with exclusive devotion. ॥ 65॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥