Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.343.60: भूमि पर एक ऊँची वेदी बनी है, जिसकी ऊँचाई आठ अंगुल के बराबर है। उस पर ब्रह्माण्ड के रचयिता परमेश्वर एक पैर पर, दोनों हाथ ऊपर उठाए, उत्तर दिशा की ओर मुख किए हुए खड़े हैं। | mahabharat अध्याय 12.343: जनमेजयका प्रश्न, देवर्षि नारदका श्वेतद्वीपसे लौटकर नर-नारायणके पास जाना और उनके पूछनेपर उनसे वहाँके महत्त्वपूर्ण दृश्यका वर्णन करना । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
वेदीमष्टनलोत्सेधां भूमावास्थाय विश्वकृत्।
एकपादस्थितो देव ऊर्ध्वबाहुरुदङ्मुख:॥ ६०॥
अनुवाद
भूमि पर एक ऊँची वेदी बनी है, जिसकी ऊँचाई आठ अंगुल के बराबर है। उस पर ब्रह्माण्ड के रचयिता परमेश्वर एक पैर पर, दोनों हाथ ऊपर उठाए, उत्तर दिशा की ओर मुख किए हुए खड़े हैं।
There is a tall altar built on the ground, the height of which is equal to the length of eight fingers. Seated on it, the Supreme Being, the creator of the universe, is standing on one leg with both arms raised upwards and facing north.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥