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mahabharat 12.343.59: वहाँ सूर्य नहीं चमकता, चन्द्रमा नहीं चमकता और कठोर तपस्या में लगे हुए भगवान् हरि के पास सांसारिक वायु भी नहीं बहती ॥59॥   |   mahabharat अध्याय 12.343: जनमेजयका प्रश्न, देवर्षि नारदका श्वेतद्वीपसे लौटकर नर-नारायणके पास जाना और उनके पूछनेपर उनसे वहाँके महत्त्वपूर्ण दृश्यका वर्णन करना   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 343: जनमेजयका प्रश्न, देवर्षि नारदका श्वेतद्वीपसे लौटकर नर-नारायणके पास जाना और उनके पूछनेपर उनसे वहाँके महत्त्वपूर्ण दृश्यका वर्णन करना  »  श्लोक 59
 
 
श्लोक  12.343.59 
न तत्र सूर्यस्तपति न सोमोऽभिविराजते।
न वायुर्वाति देवेशे तपश्चरति दुश्चरम्॥ ५९॥
 
 
अनुवाद
वहाँ सूर्य नहीं चमकता, चन्द्रमा नहीं चमकता और कठोर तपस्या में लगे हुए भगवान् हरि के पास सांसारिक वायु भी नहीं बहती ॥59॥
 
The sun does not shine there, the moon does not shine and even the mundane wind does not blow near Lord Hari who is engaged in arduous penance. ॥ 59॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)