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mahabharat 12.343.58: उस परमात्मा ने तीनों लोकों में उस शांति को फैलाया है। अपनी इसी शुभ बुद्धि से वह नैष्ठिक व्रत का आश्रय लेकर स्थित है ॥58॥   |   mahabharat अध्याय 12.343: जनमेजयका प्रश्न, देवर्षि नारदका श्वेतद्वीपसे लौटकर नर-नारायणके पास जाना और उनके पूछनेपर उनसे वहाँके महत्त्वपूर्ण दृश्यका वर्णन करना   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 343: जनमेजयका प्रश्न, देवर्षि नारदका श्वेतद्वीपसे लौटकर नर-नारायणके पास जाना और उनके पूछनेपर उनसे वहाँके महत्त्वपूर्ण दृश्यका वर्णन करना  »  श्लोक 58
 
 
श्लोक  12.343.58 
शान्ति: सा त्रिषु लोकेषु विहिता भावितात्मना।
एतया शुभया बुद्धॺा नैष्ठिकं व्रतमास्थित:॥ ५८॥
 
 
अनुवाद
उस परमात्मा ने तीनों लोकों में उस शांति को फैलाया है। अपनी इसी शुभ बुद्धि से वह नैष्ठिक व्रत का आश्रय लेकर स्थित है ॥58॥
 
That Supreme Soul has spread that peace in all three worlds. With this auspicious intellect of his, he is situated by taking shelter of Naishthik Vrata. 58॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)