श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 343: जनमेजयका प्रश्न, देवर्षि नारदका श्वेतद्वीपसे लौटकर नर-नारायणके पास जाना और उनके पूछनेपर उनसे वहाँके महत्त्वपूर्ण दृश्यका वर्णन करना  »  श्लोक 56
 
 
श्लोक  12.343.56 
स कर्ता कारणं चैव कार्यं चातिबलद्युति:।
हेतुश्चाज्ञा विधानं च तत्त्वं चैव महायशा:॥ ५६॥
 
 
अनुवाद
वे ही कर्ता, कारण और कार्य हैं। उनकी शक्ति और महिमा अनंत है। वे ही तेजोमय ईश्वर कारण, आदेश, नियम और सिद्धांत हैं ॥ 56॥
 
He is the doer, the cause and the effect. His power and glory are infinite. That glorious God is the cause, the command, the law and the principle. ॥ 56॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)