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mahabharat 12.343.55: वे सर्वव्यापी भगवान हैं, जो जगत का पालन करते हैं और महान भक्त हैं। भगवान के भक्तों में सबसे प्रिय और प्रियतम श्रीहरि, जहाँ भक्तों द्वारा उनकी पूजा की जाती है, वहाँ सदैव प्रसन्न रहते हैं।   |   mahabharat अध्याय 12.343: जनमेजयका प्रश्न, देवर्षि नारदका श्वेतद्वीपसे लौटकर नर-नारायणके पास जाना और उनके पूछनेपर उनसे वहाँके महत्त्वपूर्ण दृश्यका वर्णन करना   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 343: जनमेजयका प्रश्न, देवर्षि नारदका श्वेतद्वीपसे लौटकर नर-नारायणके पास जाना और उनके पूछनेपर उनसे वहाँके महत्त्वपूर्ण दृश्यका वर्णन करना  »  श्लोक 55
 
 
श्लोक  12.343.55 
रमते सोऽर्च्यमानो हि सदा भागवतप्रिय:।
विश्वभुक् सर्वगो देवो माधवो भक्तवत्सल:॥ ५५॥
 
 
अनुवाद
वे सर्वव्यापी भगवान हैं, जो जगत का पालन करते हैं और महान भक्त हैं। भगवान के भक्तों में सबसे प्रिय और प्रियतम श्रीहरि, जहाँ भक्तों द्वारा उनकी पूजा की जाती है, वहाँ सदैव प्रसन्न रहते हैं।
 
He is the omnipresent Lord who maintains the world and is a great devotee. Sri Hari, the lover and dearest of the devotees of God, remains always happy where he is worshiped by them.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)