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mahabharat 12.343.51: हे धर्म के पुत्रों, आप दोनों के अतिरिक्त तीनों लोकों में तेज, यश और धन में भगवान् के समान और कौन है? ॥ 51॥   |   mahabharat अध्याय 12.343: जनमेजयका प्रश्न, देवर्षि नारदका श्वेतद्वीपसे लौटकर नर-नारायणके पास जाना और उनके पूछनेपर उनसे वहाँके महत्त्वपूर्ण दृश्यका वर्णन करना   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 343: जनमेजयका प्रश्न, देवर्षि नारदका श्वेतद्वीपसे लौटकर नर-नारायणके पास जाना और उनके पूछनेपर उनसे वहाँके महत्त्वपूर्ण दृश्यका वर्णन करना  »  श्लोक 51
 
 
श्लोक  12.343.51 
को हि नाम भवेत् तस्य तेजसा यशसा श्रिया।
सदृशस्त्रिषु लोकेषु ऋते धर्मात्मजौ युवाम्॥ ५१॥
 
 
अनुवाद
हे धर्म के पुत्रों, आप दोनों के अतिरिक्त तीनों लोकों में तेज, यश और धन में भगवान् के समान और कौन है? ॥ 51॥
 
Besides you two, the sons of Dharma, who else in the three worlds is equal to the Supreme Lord in brilliance, fame and wealth? ॥ 51॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)