श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 343: जनमेजयका प्रश्न, देवर्षि नारदका श्वेतद्वीपसे लौटकर नर-नारायणके पास जाना और उनके पूछनेपर उनसे वहाँके महत्त्वपूर्ण दृश्यका वर्णन करना  »  श्लोक 50
 
 
श्लोक  12.343.50 
दृष्टौ युवां मया तत्र तस्य देवस्य पार्श्वत:।
इहैव चागतोऽस्म्यद्य विसृष्ट: परमात्मना॥ ५०॥
 
 
अनुवाद
इतना ही नहीं, मैंने वहाँ भी तुम दोनों को परमेश्वर के साथ उपस्थित देखा था और उन्हीं परमेश्वर के कारण आज पुनः मुझे यहाँ भेजा है ॥50॥
 
Not only this, I had seen you both there also present with the Supreme Lord and because of the same Supreme Lord sending me here today again. ॥ 50॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)