श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 343: जनमेजयका प्रश्न, देवर्षि नारदका श्वेतद्वीपसे लौटकर नर-नारायणके पास जाना और उनके पूछनेपर उनसे वहाँके महत्त्वपूर्ण दृश्यका वर्णन करना  »  श्लोक 48-49
 
 
श्लोक  12.343.48-49 
अद्यापि चैनं पश्यामि युवां पश्यन् सनातनौ॥ ४८॥
यैर्लक्षणैरुपेत: स हरिरव्यक्तरूपधृक्।
तैर्लक्षणैरुपेतौ हि व्यक्तरूपधरौ युवाम्॥ ४९॥
 
 
अनुवाद
इस समय भी आप दोनों सनातन पुरुषों को देखकर मुझे यहाँ श्वेत द्वीप पर निवास करने वाले भगवान् का दर्शन हो रहा है। वहाँ मैंने अव्यक्त रूप में श्रीहरि के जो-जो लक्षण देखे थे, आप दोनों व्यक्त रूप में भी उन्हीं लक्षणों से सुशोभित हैं। ॥48-49॥
 
Even at this time, looking at you two eternal men, I am getting a glimpse of the Lord residing here on the white island. Whatever characteristics I had seen Shri Hari in the unmanifested form there, you two men in the manifested form are also adorned with the same characteristics. ॥ 48-49॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)