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mahabharat 12.343.4: सर्वत्र विख्यात भगवान नारायणदेव का दर्शन ब्रह्मा आदि सभी देवताओं तथा अन्य महर्षियों के लिए भी दुर्लभ है। 4॥   |   mahabharat अध्याय 12.343: जनमेजयका प्रश्न, देवर्षि नारदका श्वेतद्वीपसे लौटकर नर-नारायणके पास जाना और उनके पूछनेपर उनसे वहाँके महत्त्वपूर्ण दृश्यका वर्णन करना   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 343: जनमेजयका प्रश्न, देवर्षि नारदका श्वेतद्वीपसे लौटकर नर-नारायणके पास जाना और उनके पूछनेपर उनसे वहाँके महत्त्वपूर्ण दृश्यका वर्णन करना  »  श्लोक 4
 
 
श्लोक  12.343.4 
दुर्दर्शो भगवान् देव: सर्वलोकनमस्कृत:।
सब्रह्मकै: सुरै: कृत्स्नैरन्यैश्चैव महर्षिभि:॥ ४॥
 
 
अनुवाद
सर्वत्र विख्यात भगवान नारायणदेव का दर्शन ब्रह्मा आदि सभी देवताओं तथा अन्य महर्षियों के लिए भी दुर्लभ है। 4॥
 
The darshan of the universally celebrated Lord Narayandev is rare even for all the gods like Brahma and other Maharishis. 4॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)