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mahabharat 12.343.35: वे दोनों सूर्य से भी अधिक तेजस्वी थे और सम्पूर्ण जगत को प्रकाशित कर रहे थे। उन पूज्य मुनियों की छाती पर श्रीवत्स के चिह्न शोभायमान थे और वे मस्तक पर जटाएँ धारण किये हुए थे।   |   mahabharat अध्याय 12.343: जनमेजयका प्रश्न, देवर्षि नारदका श्वेतद्वीपसे लौटकर नर-नारायणके पास जाना और उनके पूछनेपर उनसे वहाँके महत्त्वपूर्ण दृश्यका वर्णन करना   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 343: जनमेजयका प्रश्न, देवर्षि नारदका श्वेतद्वीपसे लौटकर नर-नारायणके पास जाना और उनके पूछनेपर उनसे वहाँके महत्त्वपूर्ण दृश्यका वर्णन करना  »  श्लोक 35
 
 
श्लोक  12.343.35 
तेजसाभ्यधिकौ सूर्यात् सर्वलोकविरोचनात्।
श्रीवत्सलक्षणौ पूज्यौ जटामण्डलधारिणौ॥ ३५॥
 
 
अनुवाद
वे दोनों सूर्य से भी अधिक तेजस्वी थे और सम्पूर्ण जगत को प्रकाशित कर रहे थे। उन पूज्य मुनियों की छाती पर श्रीवत्स के चिह्न शोभायमान थे और वे मस्तक पर जटाएँ धारण किये हुए थे।
 
Both of them were more radiant than the Sun, illuminating the entire world. The symbols of Shrivatsa were adorning the chests of those revered saints and they were wearing matted locks on their heads.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)