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mahabharat 12.343.32: हे मनुष्यों के स्वामी! तत्पश्चात् उन्हें यह सोचकर आश्चर्य हुआ कि मैं इतनी लम्बी यात्रा करके कैसे सकुशल यहाँ वापस आ गया?॥ 32॥   |   mahabharat अध्याय 12.343: जनमेजयका प्रश्न, देवर्षि नारदका श्वेतद्वीपसे लौटकर नर-नारायणके पास जाना और उनके पूछनेपर उनसे वहाँके महत्त्वपूर्ण दृश्यका वर्णन करना   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 343: जनमेजयका प्रश्न, देवर्षि नारदका श्वेतद्वीपसे लौटकर नर-नारायणके पास जाना और उनके पूछनेपर उनसे वहाँके महत्त्वपूर्ण दृश्यका वर्णन करना  »  श्लोक 32
 
 
श्लोक  12.343.32 
पश्चादस्याभवद् राजन्नात्मन: साध्वसं महत्।
यद् गत्वा दूरमध्वानं क्षेमी पुनरिहागत:॥ ३२॥
 
 
अनुवाद
हे मनुष्यों के स्वामी! तत्पश्चात् उन्हें यह सोचकर आश्चर्य हुआ कि मैं इतनी लम्बी यात्रा करके कैसे सकुशल यहाँ वापस आ गया?॥ 32॥
 
O Lord of men! Thereafter he was astonished to think, how did I come back here safely after travelling such a long distance?॥ 32॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)