vedamrit
Reset
Home
प्रमुख ग्रंथ
भगवद गीता
श्रीमद् रामायण
श्रीमद् भागवतम
श्री महाभारत
श्री रामचरितमानस
श्रीमद् विष्णु पुराण
श्रीचैतन्य भागवत
श्रीचैतन्य चरितामृत
भक्तिरसामृतसिन्धु
वैष्णव भजन, इस्कॉन आरती
Apps
About
Contact
श्री महाभारत
»
पर्व 12: शान्ति पर्व
»
अध्याय 343: जनमेजयका प्रश्न, देवर्षि नारदका श्वेतद्वीपसे लौटकर नर-नारायणके पास जाना और उनके पूछनेपर उनसे वहाँके महत्त्वपूर्ण दृश्यका वर्णन करना
»
श्लोक 32
श्लोक
12.343.32
पश्चादस्याभवद् राजन्नात्मन: साध्वसं महत्।
यद् गत्वा दूरमध्वानं क्षेमी पुनरिहागत:॥ ३२॥
अनुवाद
हे मनुष्यों के स्वामी! तत्पश्चात् उन्हें यह सोचकर आश्चर्य हुआ कि मैं इतनी लम्बी यात्रा करके कैसे सकुशल यहाँ वापस आ गया?॥ 32॥
O Lord of men! Thereafter he was astonished to think, how did I come back here safely after travelling such a long distance?॥ 32॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
About Us
|
Contact Us
|
Privacy Policy
|
Connect Form
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
© 2023 vedamrit.in - All Rights Reserved. Developed by ACd
Download SongBook App
Install
×