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mahabharat 12.343.3: सब पापों से मुक्त करने वाली नारायण सम्बन्धिनी की इस पुण्यमयी कथा को आरम्भ से सुनने से हमारा तन-मन पवित्र हो गया। 3॥   |   mahabharat अध्याय 12.343: जनमेजयका प्रश्न, देवर्षि नारदका श्वेतद्वीपसे लौटकर नर-नारायणके पास जाना और उनके पूछनेपर उनसे वहाँके महत्त्वपूर्ण दृश्यका वर्णन करना   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 343: जनमेजयका प्रश्न, देवर्षि नारदका श्वेतद्वीपसे लौटकर नर-नारायणके पास जाना और उनके पूछनेपर उनसे वहाँके महत्त्वपूर्ण दृश्यका वर्णन करना  »  श्लोक 3
 
 
श्लोक  12.343.3 
पाविताङ्गा: स्म संवृत्ता: श्रुत्वेमामादित: कथाम्।
नारायणाश्रयां पुण्यां सर्वपापप्रमोचनीम्॥ ३॥
 
 
अनुवाद
सब पापों से मुक्त करने वाली नारायण सम्बन्धिनी की इस पुण्यमयी कथा को आरम्भ से सुनने से हमारा तन-मन पवित्र हो गया। 3॥
 
Our body and mind became pure by listening from the beginning to this virtuous story of Narayan Sambandhini, who frees us from all sins. 3॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)