श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 343: जनमेजयका प्रश्न, देवर्षि नारदका श्वेतद्वीपसे लौटकर नर-नारायणके पास जाना और उनके पूछनेपर उनसे वहाँके महत्त्वपूर्ण दृश्यका वर्णन करना  »  श्लोक 25-26h
 
 
श्लोक  12.343.25-26h 
तद् दृष्टवांस्तदा देवमनिरुद्धतनौ स्थितम्।
बदरीमाश्रमं यत् तु नारद: प्राद्रवत् पुन:॥ २५॥
नरनारायणौ द्रष्टुं किं तु तत् कारणं मुने।
 
 
अनुवाद
मुने ! उस समय नारद जी श्वेतद्वीप में जाकर अनिरुद्ध-विग्रह में स्थित नारायणदेव से मिले और पुनः नर-नारायण के दर्शन करने के लिए बदरिका आश्रम में गए। इसका क्या कारण है? 25 1/2॥
 
Mune! At that time, Narad ji went to Shwetdweep and met Narayandev present in Aniruddha-Vigraham and again went to Badarika Ashram to have darshan of Nar-Narayan. What is the reason for this? 25 1/2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)