Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.343.22: भगवान नारायण की पूजा लोग केवल तपस्या से ही कर सकते हैं; परंतु मेरे पिता को श्रीवत्स चिह्न से विभूषित उन भगवान का अनायास ही साक्षात् दर्शन प्राप्त हो गया था॥22॥ | mahabharat अध्याय 12.343: जनमेजयका प्रश्न, देवर्षि नारदका श्वेतद्वीपसे लौटकर नर-नारायणके पास जाना और उनके पूछनेपर उनसे वहाँके महत्त्वपूर्ण दृश्यका वर्णन करना । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
तपसाथ सुदृश्यो हि भगवान् लोकपूजित:।
यं दृष्टवन्तस्ते साक्षाच्छ्रीवत्साङ्कविभूषणम्॥ २२॥
अनुवाद
भगवान नारायण की पूजा लोग केवल तपस्या से ही कर सकते हैं; परंतु मेरे पिता को श्रीवत्स चिह्न से विभूषित उन भगवान का अनायास ही साक्षात् दर्शन प्राप्त हो गया था॥22॥
People worship Lord Narayana can be seen only through penance; But my father had unexpectedly got the personal darshan of that Lord adorned with the symbol of Shrivatsa. 22॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥