तपसाथ सुदृश्यो हि भगवान् लोकपूजित:।
यं दृष्टवन्तस्ते साक्षाच्छ्रीवत्साङ्कविभूषणम्॥ २२॥
अनुवाद
भगवान नारायण की पूजा लोग केवल तपस्या से ही कर सकते हैं; परंतु मेरे पिता को श्रीवत्स चिह्न से विभूषित उन भगवान का अनायास ही साक्षात् दर्शन प्राप्त हो गया था॥22॥
People worship Lord Narayana can be seen only through penance; But my father had unexpectedly got the personal darshan of that Lord adorned with the symbol of Shrivatsa. 22॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)