Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 12.343.21: ब्रह्मन्! मेरे सभी पूर्वज धन्य थे, जिनके हित और कल्याण के लिए जनार्दन सदैव तत्पर रहते थे।   |   mahabharat अध्याय 12.343: जनमेजयका प्रश्न, देवर्षि नारदका श्वेतद्वीपसे लौटकर नर-नारायणके पास जाना और उनके पूछनेपर उनसे वहाँके महत्त्वपूर्ण दृश्यका वर्णन करना   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 343: जनमेजयका प्रश्न, देवर्षि नारदका श्वेतद्वीपसे लौटकर नर-नारायणके पास जाना और उनके पूछनेपर उनसे वहाँके महत्त्वपूर्ण दृश्यका वर्णन करना  »  श्लोक 21
 
 
श्लोक  12.343.21 
धन्याश्च सर्व एवासन् ब्रह्मंस्ते मम पूर्वजा:।
हिताय श्रेयसे चैव येषामासीज्जनार्दन:॥ २१॥
 
 
अनुवाद
ब्रह्मन्! मेरे सभी पूर्वज धन्य थे, जिनके हित और कल्याण के लिए जनार्दन सदैव तत्पर रहते थे।
 
Brahman! All my ancestors were blessed, for whose benefit and welfare Janardan was always ready.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)