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mahabharat 12.343.18: सम्पूर्ण जगत के स्वामी श्री हरि की कथा समस्त पापों का नाश करने वाली है। इसे प्रारम्भ से ही सुनकर हम सभी यहाँ पूर्णतः पवित्र हो गए हैं।॥18॥   |   mahabharat अध्याय 12.343: जनमेजयका प्रश्न, देवर्षि नारदका श्वेतद्वीपसे लौटकर नर-नारायणके पास जाना और उनके पूछनेपर उनसे वहाँके महत्त्वपूर्ण दृश्यका वर्णन करना   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 343: जनमेजयका प्रश्न, देवर्षि नारदका श्वेतद्वीपसे लौटकर नर-नारायणके पास जाना और उनके पूछनेपर उनसे वहाँके महत्त्वपूर्ण दृश्यका वर्णन करना  »  श्लोक 18
 
 
श्लोक  12.343.18 
सर्वथा पाविता: स्मेह श्रुत्वेमामादित: कथाम्।
हरेर्विश्वेश्वरस्येह सर्वपापप्रणाशनीम्॥ १८॥
 
 
अनुवाद
सम्पूर्ण जगत के स्वामी श्री हरि की कथा समस्त पापों का नाश करने वाली है। इसे प्रारम्भ से ही सुनकर हम सभी यहाँ पूर्णतः पवित्र हो गए हैं।॥18॥
 
The story of Shri Hari, the Lord of the entire universe, destroys all sins. By listening to it from the very beginning, all of us here have become completely pure. ॥18॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)