श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 343: जनमेजयका प्रश्न, देवर्षि नारदका श्वेतद्वीपसे लौटकर नर-नारायणके पास जाना और उनके पूछनेपर उनसे वहाँके महत्त्वपूर्ण दृश्यका वर्णन करना  »  श्लोक 17
 
 
श्लोक  12.343.17 
सर्वाश्रमाभिगमनं सर्वतीर्थावगाहनम्।
न तथा फलदं चापि नारायणकथा यथा॥ १७॥
 
 
अनुवाद
समस्त ऋषियों के आश्रमों में जाने और समस्त तीर्थों में स्नान करने से भगवान नारायण की कथा के समान फल नहीं मिलता॥17॥
 
Visiting all the ashrams of sages and bathing in all the holy places does not give the same result as the story of Lord Narayana.॥ 17॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)