श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 343: जनमेजयका प्रश्न, देवर्षि नारदका श्वेतद्वीपसे लौटकर नर-नारायणके पास जाना और उनके पूछनेपर उनसे वहाँके महत्त्वपूर्ण दृश्यका वर्णन करना  »  श्लोक 12-13
 
 
श्लोक  12.343.12-13 
नवनीतं यथा दध्नो मलयाच्चन्दनं यथा॥ १२॥
आरण्यकं च वेदेभ्य ओषधिभ्योऽमृतं यथा।
समुद्‍धृतमिदं ब्रह्मन् कथामृतमिदं तथा॥ १३॥
 
 
अनुवाद
हे ब्रह्मन्! जैसे दही से मक्खन, मलय पर्वत से चंदन, वेदों से आरण्यक और औषधियों से अमृत निकाला गया है, उसी प्रकार आपने इस कथारूपी अमृत को निकालकर सुरक्षित रखा है॥12-13॥
 
O Brahman! Just as butter has been extracted from curd, sandalwood from Malaya mountain, Aranyakas from Vedas and nectar from medicines, in the same way you have extracted and preserved this nectar in the form of a story.॥ 12-13॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)