श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 343: जनमेजयका प्रश्न, देवर्षि नारदका श्वेतद्वीपसे लौटकर नर-नारायणके पास जाना और उनके पूछनेपर उनसे वहाँके महत्त्वपूर्ण दृश्यका वर्णन करना  »  श्लोक 1
 
 
श्लोक  12.343.1 
शौनक उवाच
सौते सुमहदाख्यानं भवता परिकीर्तितम्।
यच्छ्रुत्वा मुनय: सर्वे विस्मयं परमं गता:॥ १॥
 
 
अनुवाद
शौनक बोले- हे सूतानंदपुत्र! तुमने बहुत ही उत्तम कथा कही है। उसे सुनकर सभी ऋषिगण बहुत आश्चर्यचकित हुए॥1॥
 
Shaunak said- O son of Sootananda! You have narrated a very great story. All the sages were very surprised on hearing it.॥ 1॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)