श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 342: सृष्टिकी प्रारम्भिक अवस्थाका वर्णन, ब्राह्मणोंकी महिमा बतानेवाली अनेक प्रकारकी संक्षिप्त कथाओंका उल्लेख, भगवन्नामोंके हेतु तथारुद्रके साथ होनेवाले युद्धमें नारायणकी विजय  »  श्लोक d3h
 
 
श्लोक  12.342.d3h 
(अधो न क्षीयते यस्माद् वदन्त्यन्ये ह्यधोक्षजम्।)
 
 
अनुवाद
उसी व्युत्पत्ति के अनुसार उस ईश्वर को अन्य लोग 'अधोक्षज' कहते हैं, जिसकी कृपा से जीव अधोगति में गिरकर दुर्बल नहीं होता।
 
According to the same etymology, that God is called by others as 'Adhokshaj' by whose grace the living being does not get weakened by falling into the lower state.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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