श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 342: सृष्टिकी प्रारम्भिक अवस्थाका वर्णन, ब्राह्मणोंकी महिमा बतानेवाली अनेक प्रकारकी संक्षिप्त कथाओंका उल्लेख, भगवन्नामोंके हेतु तथारुद्रके साथ होनेवाले युद्धमें नारायणकी विजय  »  श्लोक d1
 
 
श्लोक  12.342.d1 
(नहुषस्य शापमोक्षनिमित्तं देवैर्ऋषिभिश्च याच्यमानोऽगस्त्य: प्राह।
यावत् स्वकुलज: श्रीमान् धर्मराजो युधिष्ठिर:।
कथयित्वा स्वकान् प्रश्नान् भीमं तं च विमोक्ष्यते॥ )
 
 
अनुवाद
उधर, जब देवताओं और ऋषियों ने नहुष को शाप से मुक्त करने के लिए प्रार्थना की, तो अगस्त्य ने कहा, 'जब नहुष के कुल में उत्पन्न महान धर्मराज युधिष्ठिर उनके प्रश्नों का उत्तर देंगे और भीमसेन को उनके बंधन से मुक्त कर देंगे, तब वे नहुष को भी शाप से मुक्त कर देंगे।'
 
On the other hand, when the gods and sages prayed for release of Nahush from the curse, Agastya said, 'When the great Dharmaraja Yudhishthira, born in Nahush's family, answers their questions and releases Bhimasena from their bondage, then he will also release Nahush from the curse.'
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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