श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 342: सृष्टिकी प्रारम्भिक अवस्थाका वर्णन, ब्राह्मणोंकी महिमा बतानेवाली अनेक प्रकारकी संक्षिप्त कथाओंका उल्लेख, भगवन्नामोंके हेतु तथारुद्रके साथ होनेवाले युद्धमें नारायणकी विजय  »  श्लोक 97
 
 
श्लोक  12.342.97 
एकविंशतिसाहस्रं ऋग्वेदं मां प्रचक्षते।
सहस्रशाखं यत् साम ये वै वेदविदो जना:॥ ९७॥
 
 
अनुवाद
वेदों के विद्वान मुझे इक्कीस हजार श्लोकों वाला ऋग्वेद और एक हजार शाखाओं वाला सामवेद कहते हैं।
 
The scholars of Vedas call me the Rigveda consisting of twenty-one thousand verses and the Samveda consisting of one thousand branches.
 ✨ ai-generated
 
 
  Connect Form
  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
  © 2026 vedamrit.in All Rights Reserved. Developed by acd