श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 342: सृष्टिकी प्रारम्भिक अवस्थाका वर्णन, ब्राह्मणोंकी महिमा बतानेवाली अनेक प्रकारकी संक्षिप्त कथाओंका उल्लेख, भगवन्नामोंके हेतु तथारुद्रके साथ होनेवाले युद्धमें नारायणकी विजय  »  श्लोक 96
 
 
श्लोक  12.342.96 
हिरण्यगर्भो द्युतिमान् य एष च्छन्दसि स्तुत:।
योगै: सम्पूज्यते नित्यं स एवाहं भुवि स्मृत:॥ ९६॥
 
 
अनुवाद
मैं वही तेजस्वी 'हिरण्यगर्भ' हूँ, जिसकी वेदों में प्रशंसा की गई है और जिसे इस लोक में योगीजन सदैव पूजते और स्मरण करते हैं। ॥96॥
 
I am that illustrious 'Hiranyagarbha' who has been praised in the Vedas and whom the Yogis in this world always worship and remember. ॥96॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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