श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 342: सृष्टिकी प्रारम्भिक अवस्थाका वर्णन, ब्राह्मणोंकी महिमा बतानेवाली अनेक प्रकारकी संक्षिप्त कथाओंका उल्लेख, भगवन्नामोंके हेतु तथारुद्रके साथ होनेवाले युद्धमें नारायणकी विजय  »  श्लोक 95
 
 
श्लोक  12.342.95 
विद्यासहायवन्तं मामादित्यस्थं सनातनम्।
कपिलं प्राहुराचार्या: सांख्या निश्चितनिश्चया:॥ ९५॥
 
 
अनुवाद
तत्त्व का निश्चय करने वाले सांख्यशास्त्र के आचार्यों ने ज्ञान और शक्ति से युक्त, आदित्यमण्डल में स्थित सनातन देवता मुझे 'कपिल' कहा है ॥95॥
 
The masters of Sankhya Shastra, who determine the Tattva, have called me 'Kapil', the eternal deity situated in Aditya Mandal, endowed with the company of knowledge and power. 95॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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