श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 342: सृष्टिकी प्रारम्भिक अवस्थाका वर्णन, ब्राह्मणोंकी महिमा बतानेवाली अनेक प्रकारकी संक्षिप्त कथाओंका उल्लेख, भगवन्नामोंके हेतु तथारुद्रके साथ होनेवाले युद्धमें नारायणकी विजय  »  श्लोक 94
 
 
श्लोक  12.342.94 
विरिञ्च इति यत् प्रोक्तं कापिलज्ञानचिन्तकै:।
स प्रजापतिरेवाहं चेतनात् सर्वलोककृत्॥ ९४॥
 
 
अनुवाद
मैं सम्पूर्ण लोकों का रचयिता प्रजापति विरिंच हूँ, जिन्हें कपिल मुनि द्वारा प्रतिपादित सांख्यशास्त्र का मनन करने वाले विद्वानों ने विरिंच कहा है। मैं वही विरिंच हूँ, सम्पूर्ण लोकों का रचयिता, क्योंकि मैं ही सबको चेतना प्रदान करने वाला हूँ ॥94॥
 
I am the creator of all the worlds, Prajapati Virincha, who has been called the Virincha by the scholars who have contemplated upon the Samkhya Shastra propounded by the sage Kapil. I am the same Virincha, the creator of all the worlds, because I am the one who gives consciousness to everyone. ॥94॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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