श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 342: सृष्टिकी प्रारम्भिक अवस्थाका वर्णन, ब्राह्मणोंकी महिमा बतानेवाली अनेक प्रकारकी संक्षिप्त कथाओंका उल्लेख, भगवन्नामोंके हेतु तथारुद्रके साथ होनेवाले युद्धमें नारायणकी विजय  »  श्लोक 92
 
 
श्लोक  12.342.92 
एकशृङ्ग: पुरा भूत्वा वराहो नन्दिवर्धन:।
इमां चोद्‍धृतवान् भूमिमेकशृङ्गस्ततो ह्यहम्॥ ९२॥
 
 
अनुवाद
पूर्वकाल में मैंने एक सींग वाले सूअर का रूप धारण करके पृथ्वी को जल से बाहर निकाला था और सम्पूर्ण जगत का सुख बढ़ाया था; इसलिए मैं 'एकश्रृंग' कहलाता हूँ।
 
In the past I took the form of a one-horned boar and pulled the earth out of the water and increased the happiness of the entire world; therefore I am called 'Ekasringa'.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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