श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 342: सृष्टिकी प्रारम्भिक अवस्थाका वर्णन, ब्राह्मणोंकी महिमा बतानेवाली अनेक प्रकारकी संक्षिप्त कथाओंका उल्लेख, भगवन्नामोंके हेतु तथारुद्रके साथ होनेवाले युद्धमें नारायणकी विजय  »  श्लोक 90
 
 
श्लोक  12.342.90 
न चादिं न मध्यं तथा चैव नान्तं
कदाचिद् विदन्ते सुराश्चासुराश्च।
अनाद्यो ह्यमध्यस्तथा चाप्यनन्त:
प्रगीतोऽहमीशो विभुर्लोकसाक्षी॥ ९०॥
 
 
अनुवाद
मैं जगत् का साक्षी और सर्वव्यापी परमेश्वर हूँ। देवता और दानव भी मेरे आदि, मध्य और अन्त को कभी नहीं जान सकते; इसीलिए मुझे 'सनातन', 'अमध्यम' और 'अनंत' कहा जाता है॥90॥
 
I am the witness of the universe and the omnipresent God. Even the gods and demons can never find out my beginning, middle and end; that is why I am called 'eternal', 'non-middle' and 'infinite'.॥90॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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