न चादिं न मध्यं तथा चैव नान्तं
कदाचिद् विदन्ते सुराश्चासुराश्च।
अनाद्यो ह्यमध्यस्तथा चाप्यनन्त:
प्रगीतोऽहमीशो विभुर्लोकसाक्षी॥ ९०॥
अनुवाद
मैं जगत् का साक्षी और सर्वव्यापी परमेश्वर हूँ। देवता और दानव भी मेरे आदि, मध्य और अन्त को कभी नहीं जान सकते; इसीलिए मुझे 'सनातन', 'अमध्यम' और 'अनंत' कहा जाता है॥90॥
I am the witness of the universe and the omnipresent God. Even the gods and demons can never find out my beginning, middle and end; that is why I am called 'eternal', 'non-middle' and 'infinite'.॥90॥