Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.342.88: भरतनंदन! भगवान का धर्म सम्पूर्ण जगत में वृष नाम से प्रसिद्ध है। वैदिक कोश में वृष का अर्थ धर्म बताया गया है; अतः मुझ वासुदेव को उत्तम धर्म का स्वरूप 'वृष' समझो। 88॥ | mahabharat अध्याय 12.342: सृष्टिकी प्रारम्भिक अवस्थाका वर्णन, ब्राह्मणोंकी महिमा बतानेवाली अनेक प्रकारकी संक्षिप्त कथाओंका उल्लेख, भगवन्नामोंके हेतु तथारुद्रके साथ होनेवाले युद्धमें नारायणकी विजय । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
वृषो हि भगवान् धर्म: ख्यातो लोकेषु भारत।
नैघण्टुकपदाख्याने विद्धि मां वृषमुत्तमम्॥ ८८॥
अनुवाद
भरतनंदन! भगवान का धर्म सम्पूर्ण जगत में वृष नाम से प्रसिद्ध है। वैदिक कोश में वृष का अर्थ धर्म बताया गया है; अतः मुझ वासुदेव को उत्तम धर्म का स्वरूप 'वृष' समझो। 88॥
Bharatnandan! God's religion is famous in the entire world by the name of Vrishka. In the Vedic dictionary, Vrishka has been described as meaning religion; Therefore, consider me Vasudev as 'Vrish', the embodiment of the best religion. 88॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥