श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 342: सृष्टिकी प्रारम्भिक अवस्थाका वर्णन, ब्राह्मणोंकी महिमा बतानेवाली अनेक प्रकारकी संक्षिप्त कथाओंका उल्लेख, भगवन्नामोंके हेतु तथारुद्रके साथ होनेवाले युद्धमें नारायणकी विजय  »  श्लोक 83
 
 
श्लोक  12.342.83 
निरुक्तं वेदविदुषो वेदशब्दार्थचिन्तका:।
ते मां गायन्ति प्राग्वंशे अधोक्षज इति स्थिति:॥ ८३॥
 
 
अनुवाद
वेदों के विद्वान् विद्वान् लोग वेदों के शब्दों और अर्थों का मनन करते हुए प्राग्वंश (यज्ञशाला का एक भाग) में बैठकर अधोक्षज नाम से मेरी महिमा का गान करते हैं; इसीलिए मेरा नाम 'अधोक्षज' है॥83॥
 
The learned scholars of the Vedas, who ponder over the words and meanings of the Vedas, sit in the Pragvansh (a part of the sacrificial hall) and sing my glory in the name of Adhokshaja; That's why my name is 'Adhokshaj'. 83॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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