श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 342: सृष्टिकी प्रारम्भिक अवस्थाका वर्णन, ब्राह्मणोंकी महिमा बतानेवाली अनेक प्रकारकी संक्षिप्त कथाओंका उल्लेख, भगवन्नामोंके हेतु तथारुद्रके साथ होनेवाले युद्धमें नारायणकी विजय  »  श्लोक 81
 
 
श्लोक  12.342.81 
निर्वाणं परमं ब्रह्म धर्मोऽसौ पर उच्यते।
तस्मान्न च्युतपूर्वोऽहमच्युतस्तेन कर्मणा॥ ८१॥
 
 
अनुवाद
जो ब्रह्म परम शांति है, उसे परम धर्म कहते हैं। मैं उससे पहले कभी नहीं गिरा, इसीलिए लोग मुझे 'अच्युत' कहते हैं। 81।
 
The Brahman which is the ultimate peace is called the ultimate Dharma. I have never fallen from it before, that is why people call me 'Achyuta'. 81.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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