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mahabharat 12.342.79: हे पृथापुत्र अर्जुन! मैं काले लोहे से बने विशाल हल के रूप में पृथ्वी को जोतता हूँ और मेरे शरीर का रंग काला होने के कारण मुझे 'कृष्ण' कहा जाता है।   |   mahabharat अध्याय 12.342: सृष्टिकी प्रारम्भिक अवस्थाका वर्णन, ब्राह्मणोंकी महिमा बतानेवाली अनेक प्रकारकी संक्षिप्त कथाओंका उल्लेख, भगवन्नामोंके हेतु तथारुद्रके साथ होनेवाले युद्धमें नारायणकी विजय   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 342: सृष्टिकी प्रारम्भिक अवस्थाका वर्णन, ब्राह्मणोंकी महिमा बतानेवाली अनेक प्रकारकी संक्षिप्त कथाओंका उल्लेख, भगवन्नामोंके हेतु तथारुद्रके साथ होनेवाले युद्धमें नारायणकी विजय  »  श्लोक 79
 
 
श्लोक  12.342.79 
कृषामि मेदिनीं पार्थ भूत्वा कार्ष्णायसो महान्।
कृष्णो वर्णश्च मे यस्मात् तस्मात् कृष्णोऽहमर्जुन॥ ७९॥
 
 
अनुवाद
हे पृथापुत्र अर्जुन! मैं काले लोहे से बने विशाल हल के रूप में पृथ्वी को जोतता हूँ और मेरे शरीर का रंग काला होने के कारण मुझे 'कृष्ण' कहा जाता है।
 
O son of Pritha, Arjuna! I plough the earth in the form of a huge ploughshare made of black iron and because of my body's colour being black I am called 'Krishna'.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)