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mahabharat 12.342.75-76: मैंने कभी कोई अश्लील या अश्लील बात नहीं कही। मेरी वाणी ब्रह्मा की पुत्री, सत्य की स्वरूपा देवी सरस्वती है। हे कुन्तीपुत्र! मैंने सत्य और असत्य को अपने भीतर धारण कर रखा है; इसीलिए मेरे नाभि-कमल रूपी ब्रह्मलोक में रहने वाले ऋषिगण मुझे 'सत्य' कहते हैं।   |   mahabharat अध्याय 12.342: सृष्टिकी प्रारम्भिक अवस्थाका वर्णन, ब्राह्मणोंकी महिमा बतानेवाली अनेक प्रकारकी संक्षिप्त कथाओंका उल्लेख, भगवन्नामोंके हेतु तथारुद्रके साथ होनेवाले युद्धमें नारायणकी विजय   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 342: सृष्टिकी प्रारम्भिक अवस्थाका वर्णन, ब्राह्मणोंकी महिमा बतानेवाली अनेक प्रकारकी संक्षिप्त कथाओंका उल्लेख, भगवन्नामोंके हेतु तथारुद्रके साथ होनेवाले युद्धमें नारायणकी विजय  »  श्लोक 75-76
 
 
श्लोक  12.342.75-76 
नोक्तपूर्वं मया क्षुद्रमश्लीलं वा कदाचन।
ऋता ब्रह्मसुता सा मे सत्या देवी सरस्वती॥ ७५॥
सच्चासच्चैव कौन्तेय मयाऽऽवेशितमात्मनि।
पौष्करे ब्रह्मसदने सत्यं मामृषयो विदु:॥ ७६॥
 
 
अनुवाद
मैंने कभी कोई अश्लील या अश्लील बात नहीं कही। मेरी वाणी ब्रह्मा की पुत्री, सत्य की स्वरूपा देवी सरस्वती है। हे कुन्तीपुत्र! मैंने सत्य और असत्य को अपने भीतर धारण कर रखा है; इसीलिए मेरे नाभि-कमल रूपी ब्रह्मलोक में रहने वाले ऋषिगण मुझे 'सत्य' कहते हैं।
 
I have never spoken anything vulgar or obscene. My voice is the Goddess Saraswati, the daughter of Brahma who is the embodiment of truth. O son of Kunti! I have kept the truth and the untruth within me; that is why the sages living in the Brahmaloka in the form of my navel-lotus call me 'Truth'.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)