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mahabharat 12.342.74: मैंने न पहले कभी जन्म लिया है, न अब ले रहा हूँ, न भविष्य में ले लूँगा। मैं सभी प्राणियों के शरीर में स्थित क्षेत्रात्मा का ज्ञाता हूँ। इसीलिए मेरा नाम 'अज' है।   |   mahabharat अध्याय 12.342: सृष्टिकी प्रारम्भिक अवस्थाका वर्णन, ब्राह्मणोंकी महिमा बतानेवाली अनेक प्रकारकी संक्षिप्त कथाओंका उल्लेख, भगवन्नामोंके हेतु तथारुद्रके साथ होनेवाले युद्धमें नारायणकी विजय   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 342: सृष्टिकी प्रारम्भिक अवस्थाका वर्णन, ब्राह्मणोंकी महिमा बतानेवाली अनेक प्रकारकी संक्षिप्त कथाओंका उल्लेख, भगवन्नामोंके हेतु तथारुद्रके साथ होनेवाले युद्धमें नारायणकी विजय  »  श्लोक 74
 
 
श्लोक  12.342.74 
न हि जातो न जायेयं न जनिष्ये कदाचन।
क्षेत्रज्ञ: सर्वभूतानां तस्मादहमज: स्मृत:॥ ७४॥
 
 
अनुवाद
मैंने न पहले कभी जन्म लिया है, न अब ले रहा हूँ, न भविष्य में ले लूँगा। मैं सभी प्राणियों के शरीर में स्थित क्षेत्रात्मा का ज्ञाता हूँ। इसीलिए मेरा नाम 'अज' है।
 
I have never taken birth before, nor am I taking birth now, nor will I take birth in the future. I am the knower of the field soul residing in the bodies of all living beings. That is why my name is 'Aja'.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)