Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 12.342.70: प्राचीन काल में मैंने वराह रूप धारण करके नष्ट हो चुकी और रसातल में गई हुई पृथ्वी को पुनः प्राप्त किया था, इसीलिए देवताओं ने अपनी वाणी से मुझे 'गोविन्द' कहकर मेरी स्तुति की थी (गा विन्दति इति गोविन्द: - जो पृथ्वी को प्राप्त करता है, उसका नाम गोविन्द है)॥70॥   |   mahabharat अध्याय 12.342: सृष्टिकी प्रारम्भिक अवस्थाका वर्णन, ब्राह्मणोंकी महिमा बतानेवाली अनेक प्रकारकी संक्षिप्त कथाओंका उल्लेख, भगवन्नामोंके हेतु तथारुद्रके साथ होनेवाले युद्धमें नारायणकी विजय   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 342: सृष्टिकी प्रारम्भिक अवस्थाका वर्णन, ब्राह्मणोंकी महिमा बतानेवाली अनेक प्रकारकी संक्षिप्त कथाओंका उल्लेख, भगवन्नामोंके हेतु तथारुद्रके साथ होनेवाले युद्धमें नारायणकी विजय  »  श्लोक 70
 
 
श्लोक  12.342.70 
नष्टां च धरणीं पूर्वमविन्दं वै गुहागताम्।
गोविन्द इति तेनाहं देवैर्वाग्भिरभिष्टुत:॥ ७०॥
 
 
अनुवाद
प्राचीन काल में मैंने वराह रूप धारण करके नष्ट हो चुकी और रसातल में गई हुई पृथ्वी को पुनः प्राप्त किया था, इसीलिए देवताओं ने अपनी वाणी से मुझे 'गोविन्द' कहकर मेरी स्तुति की थी (गा विन्दति इति गोविन्द: - जो पृथ्वी को प्राप्त करता है, उसका नाम गोविन्द है)॥70॥
 
In ancient times, I had reclaimed the earth, which had been destroyed and had gone into the abyss, by assuming the form of a Varaha, that is why the Gods had praised me by calling me 'Govind' through their voice (Ga Vindati Iti Govind: - The one who attains the earth, his name is Govind). 70॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)