श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 342: सृष्टिकी प्रारम्भिक अवस्थाका वर्णन, ब्राह्मणोंकी महिमा बतानेवाली अनेक प्रकारकी संक्षिप्त कथाओंका उल्लेख, भगवन्नामोंके हेतु तथारुद्रके साथ होनेवाले युद्धमें नारायणकी विजय  »  श्लोक 69
 
 
श्लोक  12.342.69 
धाम सारो हि भूतानाम् ऋतं चैव विचारितम्।
ऋतधामा ततो विप्रै: सद्यश्चाहं प्रकीर्तित:॥ ६९॥
 
 
अनुवाद
जीवों के सार को धाम कहते हैं और ऋत का अर्थ सत्य है, ऐसा विद्वानों ने सोचा है! इसीलिए ब्राह्मणों ने तुरन्त मेरा नाम 'ऋतधाम' रख दिया।
 
The essence of living beings is called Dham and Rta means truth, this is what the learned have thought! That is why the Brahmins immediately named me 'Ritadhama'.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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