श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 342: सृष्टिकी प्रारम्भिक अवस्थाका वर्णन, ब्राह्मणोंकी महिमा बतानेवाली अनेक प्रकारकी संक्षिप्त कथाओंका उल्लेख, भगवन्नामोंके हेतु तथारुद्रके साथ होनेवाले युद्धमें नारायणकी विजय  »  श्लोक 68
 
 
श्लोक  12.342.68 
इलोपहूतयोगेन हरे भागं क्रतुष्वहम्।
वर्णश्च मे हरि: श्रेष्ठस्तस्माद्धरिरहं स्मृत:॥ ६८॥
 
 
अनुवाद
यज्ञ में 'इलोपाहुता सह दिवा' आदि मंत्र से आवाहन करने पर मैं अपना भाग स्वीकार करता हूँ। मेरे शरीर का रंग भी हरा (साँवला) है, इसलिए मुझे 'हरि' कहते हैं। 68।
 
When invoked in the yajna with the mantra 'Ilopahuta saha diva' etc., I accept my share. The colour of my body is also green (dark), hence I am called 'Hari'. 68.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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