श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 342: सृष्टिकी प्रारम्भिक अवस्थाका वर्णन, ब्राह्मणोंकी महिमा बतानेवाली अनेक प्रकारकी संक्षिप्त कथाओंका उल्लेख, भगवन्नामोंके हेतु तथारुद्रके साथ होनेवाले युद्धमें नारायणकी विजय  »  श्लोक 64
 
 
श्लोक  12.342.64 
क्षत्रमपि च ब्राह्मणप्रसादादेव शाश्वतीमव्ययां च पृथिवीं पत्नीमभिगम्य बुभूजे॥ ६४॥
 
 
अनुवाद
क्षत्रिय जाति भी ब्राह्मणों की कृपा से इस सनातन और अविनाशी पृथ्वी को पत्नी के समान भोगती है ॥ 64॥
 
Even the Kshatriya caste, by the grace of the Brahmins, enjoys this ever-lasting and indestructible Earth like a wife. ॥ 64॥
 ✨ ai-generated
 
 
  Connect Form
  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
  © 2026 vedamrit.in All Rights Reserved. Developed by acd