श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 342: सृष्टिकी प्रारम्भिक अवस्थाका वर्णन, ब्राह्मणोंकी महिमा बतानेवाली अनेक प्रकारकी संक्षिप्त कथाओंका उल्लेख, भगवन्नामोंके हेतु तथारुद्रके साथ होनेवाले युद्धमें नारायणकी विजय  »  श्लोक 63
 
 
श्लोक  12.342.63 
अद्यप्रभृत्येतदवस्थितमृषिवचनं तदेवंविधं माहात्म्यं ब्राह्मणानाम्॥ ६३॥
 
 
अनुवाद
आज भी महर्षि के ये शब्द हिमवान पर उसी प्रकार लागू होते हैं। ऐसी है ब्राह्मणों की महानता।
 
Even today, the words of Maharshi are applicable to Himavan in the same manner. Such is the greatness of the Brahmins.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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