| श्री महाभारत » पर्व 12: शान्ति पर्व » अध्याय 342: सृष्टिकी प्रारम्भिक अवस्थाका वर्णन, ब्राह्मणोंकी महिमा बतानेवाली अनेक प्रकारकी संक्षिप्त कथाओंका उल्लेख, भगवन्नामोंके हेतु तथारुद्रके साथ होनेवाले युद्धमें नारायणकी विजय » श्लोक 62 |
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| | | | श्लोक 12.342.62  | | हिमवतो गिरेर्दुहितरमुमां कन्यां रुद्रश्चकमे भृगुरपि च महर्षिर्हिमवन्तमागत्याब्रवीत् कन्यामिमां मे देहीति तमब्रवीद्धिमवानभिलक्षितो वरो रुद्र इति तमब्रवीद् भृगुर्यस्मात् त्वयाहं कन्यावरणकृतभाव: प्रत्याख्यातस्तस्मान्न रत्नानां भवान् भाजनं भविष्यतीति॥ ६२॥ | | | | | | अनुवाद | | रुद्र ने हिमवान की पुत्री उमा को, जब वह अभी कुंवारी थी, प्राप्त करने की इच्छा की। उधर महर्षि भृगु भी वहाँ आए और हिमवान से बोले, 'अपनी यह पुत्री मुझे दे दीजिए।' तब हिमवान ने उनसे कहा, 'इस पुत्री के लिए बहुत सोच-विचार कर चुना गया वर भगवान रुद्र हैं।' तब भृगु बोले, 'मैं तो इस पुत्री से विवाह करने के लिए यहाँ आया था, किन्तु तुमने मेरी उपेक्षा की है; इसलिए मैं तुम्हें शाप देता हूँ कि तुम रत्नों के भण्डार नहीं बनोगे।' | | | | Rudra desired to have Himavan's daughter Uma when she was still a virgin. On the other hand, Maharishi Bhrigu also came there and said to Himavan, 'Give me this daughter of yours.' Then Himavan said to him, 'The groom selected for this daughter after careful consideration is Lord Rudra.' Then Bhrigu said, 'I had come here with the intention of marrying the daughter, but you have ignored me; therefore I curse you that you will not be a storehouse of gems.' | | ✨ ai-generated | | |
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